मोदी मा बड़ी आग है !
Written by मुकेश कुमार on Thursday, November 01, 2007जब कभी वह आग उगलते हैं तो नॉर्मल लगते हैं। चुनाव लड़ने से पहले उन्हें अपनी पार्टी के भीतर विरोधियों से लड़ना पड़ेगा। अगर किसी के पास माचिस न हो और उसे बीड़ी जलानी हो तो कम से कम भारत में चिन्ता की कोई बात नहीं, क्योंकि यहां दो आइटम ऐसे हैं जिनसे इस स्थिति में काम चलाया जा सकता है। उनमें से एक तो आप जानते ही हैं- आदरणीय बिपाशा बसु। और दूसरे श्रद्घेय महानुभाव हैं नरेन्द्र मोदी। बिपाशा के तो सिर्फ जिगर में ही आग है, जिससे सिर्फ बीड़ी ही जलाई जा सकती है, लेकिन गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी के अग्निपुरुष नरेन्द्र मोदी के दिल, दिमाग, जिगर, गुर्दा, हाथ, पांव यानी सारी बॉडी में आग ही आग है। बीजेपी को देश भर में कहीं भी होने वाले चुनावों की आग जब प्रज्ज्वलित करनी होती है, तब वहां नरेन्द्र मोदी को सादर आमंत्रित किया जाता रहा है। भारतीय व्यंग्य साहित्य में नरेन्द्र मोदी का अभूतपूर्व योगदान है। वह जब भी हिन्दुत्व को ऊंचा उठाने की कोशिश में अपने मौलिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं तो पता नहीं हिन्दुत्व ऊंचा उठता है या नहीं, पर तब देश भर के व्यंग्यकारों की कलम को स्याही जरूर मिल जाती है। देश के विभिन्न राज्यों में राज्य स्तर के विभिन्न हिन्दू हृदय सम्राट हैं, लेकिन मोदी जी राष्ट्रीय स्तर के हिन्दूहृदय सम्राट हैं। देश के अन्य हिन्दू हृदय सम्राट हिन्दुत्व के ब्रांड के प्रतिनिधि हैं, पर मोदी जी हिन्दुत्व के ब्रांड एम्बेसेडर हैं। पता नहीं प्रेम, दया, करुणा, शांति भरे देश के हिन्दुओं और हिन्दू धर्म के हृदय को वह कितना जानते-समझते हैं। दरअसल इसके लिए एक ठोस हृदय होना भी जरूरी है। जब कभी वह आग उगलते हैं, नॉर्मल लगते हैं। पर मुम्बई की ट्रेनों में हुए विस्फोटों के बाद जब मुम्बई में वह कहते हैं कि 'बम विस्फोट में जो मारे गए जो घायल हुए वे सारे मेरे भाई हैं, फिर उनकी जाति, धर्म चाहे जो हो', 'तब लगता है मोदी जी की तबीयत कुछ नासाज है।' मोदी जी इतने बिजी रहते हैं कि ट्वेंटी20 की ऐतिहासिक विजय के बाद अन्य राज्यों के खिलाड़ियों को उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा सम्मानित करने के काफी दिनों बाद मोदी जी को इरफान और यूसुफ पठान को सम्मानित करने की याद आई थी। नरेन्द्र मोदी नेता हैं, कवि और अभिनेता भी। वह 'विक्रम-बेताल' का अक्सर मंचन करते रहते हैं। अब लोगों को और खास तौर पर इन मुए पत्रकारों को क्या कहें, इतने बरस बीत जाने के बाद भी बंदों ने गोधरा की आग की खबरों में जगाए ही रखा है। दरअसल गोधरा- कांड बेताल बनकर बार- बार राजा विक्रम यानी मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के सिर पर सवार होता रहता है। मगर कभी-कभी जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के अल्पसंख्यकों पर सवार होने की कोशिश करते हैं, तब लगता है विक्रम बेताल की भूमिका में आ चुका है। बीजेपी और नरेन्द्र मोदी अपनी मौलिक और अद्वितीय सोच के लिए देश भर में विख्यात हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवनकाल में उन्होंने कभी बीजेपी या आरएसएस की ओर देखा तक न हो, पर पिछले कुछ सालों से सरदार पटेल के प्रति बीजेपी वालों को, खासकर नरेन्द्र मोदी का इतना प्रेम उमड़ा है कि उन्होंने अपने पार्टी स्तर पर लालकृष्ण आडवाणी को आधुनिक सरदार पटेल घोषित करते हुए पटेल के तमाम मार्ग के अनुसरणकर्ता वाहक के रूप में नरेंद्र मोदी नामक जाज्ज्वल्यमान सितारे को प्रस्तुत किया है। नरेन्द्र मोदी का पटेल- प्रेम बस इतना ही है। गुजरात के अन्य पटेलों के प्रति वह उतने ही आक्रामक होते हैं जितने वह पाकिस्तान के प्रति होते हैं। इन पटेलों में प्रमुख नाम केशुभाई पटेल का है। अब गुजरात विधानसभा का चुनाव सामने है। दो बार मोदी चुनाव जीत चुके हैं, पर तीसरी बार केशु भाई ही नहीं, कांशीराम राणा, सुरेश मेहता, वल्लभभाई कथीरिया और आदि दिग्गजों से भी चुनाव के पहले मोदी ही को लड़ना पड़ सकता है। ऐसे में उनकी हिन्दुत्व की तलवार भी लम्बे समय से जंग लगी हुई हालत में हैं। पिछले दिनों मोदी जी मुम्बई पधारे। वहां मुम्बई के कुछ गुजरातियों को, कुछ पत्रकारों और बीजेपी वालों ने मिलकर सम्पूर्ण मुम्बई के गुजरातियों का प्रतिनिधि घोषित कर दिया। सभा में श्रोताओं में से मोदी जी के भाषण के दौरान घोषणा गूंजी- 'नरेन्द्र मोदी आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं।' तभी अपने भव्य- दिव्य और गदगदाए स्वर में मोदी जी ने जनता से कहा: 'भई, मेरे साथ मत आओ, मेरा रास्ता कांटों भरा है।' कहीं मोदी जी का यह वाक्य अगले विधानसभा चुनाव में गुजरात की जनता ने सुन लिया तो अगला पथ मोदी जी के लिए वाकई कांटों भरा हो सकता है। ' वे आए, देखा और छा गए' -यह मुहावरा अब शायद नरेन्द्र मोदी जी के लिए पुराना पड़ चुका है। पहले भले ही उनकी सभाओं में ऐसा होता हो, पर पिछले दिनों एक टीवी चैनल के लाइव टेलिकास्ट में दो चार सवालों के बाद ही इस वीर पुरुष की सिट्टी- पिट्टी गुम हो गई और शो अधूरा छोड़कर 'शो मस्ट गो ऑन' के नियम को गलत साबित करते हुए शो मैन ही शो से गायब हो गया।
सोजन्य - नवभारत टाइम्स

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1 comments: Responses to “ मोदी मा बड़ी आग है ! ”
By अतुल on Thursday, November 01, 2007 7:53:00 PM
बहुत अच्छा विश्लेषण
अतुल